Friday, October 26, 2007

फिर भी बीजेपी को शर्म नहीं आती

तहलका में गुजरात दंगों का सच आने के बाद से पूरे देश में तहलका है। लेकिन बीजेपी चोरी के बाद सीनाज़ोरी पर उतर आई है। वो बड़े शान से बता रही है कि गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के इशारे पर ये ख़बर चलाई गई है। लेकिन बीजेपी के पास इस सवाल का जवाब नहीं है कि कैमरे पर सच्चाई उगलनेवाले भगवा बिग्रेड के लोग सच बोल रहे हैं या फिर झूठ? यहां आकर बीजेपी के मुंह पर ताला लग जाता है। बस रटुआ तोते की तरह बोले जा रही है कि दोषियों को सज़ा मिले लेकिन अदालत से ।
बीजेपी शायद ये भूल गई है कि 1992 में बाबरी मस्जि़द गिरानेवाले लोगों को पूरी दुनिया ने देखा था। फिर भी असलियत जानने के लिए कमीशन बनाया गया। इतिहास के एख सुनहरे पन्ने को नोंचे हुए क़रीब पंद्रह साल हो गए। लेकिन गुंबद और मस्जिद तोड़नेवाले की सूरत साफ नहीं हो पाई है। शायद बाबरी मस्जिद ढहानेवालों की मौत के बाद सच्चाई पर से परदा उठे कि फलां फलां को मस्जिद गिराए जाने का दोषी पाया गया है औऱ उन्हे इतने साल की सज़ा सुनाई जा रही है । सज़ा पाने वाले भले ही स्वर्ग या नर्क पहुंच गए हों। ख़ैर, अपन मुद्दे से भटक रहे हैं।
नरेंद्र मोदी से पहली बार तब मिला था, जब दिल्ली में विधानसभा के चुनाव होनेवाले थे। मुख्यमंत्री के दावेदार मदनलाल खुराना के पीछे खुली जीप में सुषमा स्वराज के साथ जनता का अभिवादन करते देखा था। उस समय भी उनका चेहरा मुझे बेहद निष्ठुर नज़र आया था। पता नहीं क्यों उस सूरत को नहीं भूल सकता। क्योंकि उस मुद्रा में तानाशाह हिटलर की छवि नज़र आती थी। उस तस्वीर को मैंने एक साप्ताहिक पत्रिका के कवर पर छापा था। फिर दूसरी बार तब मुलाक़ात हुई , जब वो बीजेपी की केंद्रीय कमेटी में बड़ी कुर्सी पर बैठे। पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ हिंदुस्तान आए हुए थे। आगरा में अटल बिहारी वाजपेयी से बात चल रही थी। न्यूज़ चैनल पर अरूप घोष और अनुराग तोमर एंकरिंग कर रहे थे और चैनल हेड संजय पुगलिया आगरा में रिपोर्टिंग कर रहे थे। रात के क़रीब दस बजे के आस- पास सबसे पहले संजय पुगलिया ने ख़बर ब्रेक की। ये वाक्य आज तक मुझे याद है। संजय- अरूप, मैं अभी पक्के तौर पर नहीं कह सकता। लेकिन जो ख़बर मेरे पास छन-छनकर आ रही है , उससे लगता है कि बातचीत टूट गई है। वार्ता फेल हो गई है।इतना सुनते ही स्टूडियो में बैठे नरेंद्र मोदी ने आपा खो दिया। लगे अनाप शनाप बकने। उसके चेहरे से , उसके गरजने से तानाशाही की बू आ रही थी। मोदी ने बातचीत टूटने की ख़बर बतानेवालों को देश का दुश्मन करार दिया था। लेकिन बाद में क्या हुआ- सबको मालूम है। ये मेरी मोदी से दूसरी मुलाक़ात थी। तब मेरा शक़ यक़ीन में बदल गया औऱ मन ही मन बुदबुदाया- कौन कहता है कि हिटलर मर गया? तहलका ने छुपे कैमरे से छुपा सच दिखा दिया।
28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद के नरौदा पाटिया में भगवा बिग्रेड ने मुसलमानों को ऐसे काट डाला, जैसे कि भेड़ - बकरियों को भी नहीं काटा जाता। इस घटना को सुनकर ही हर हिंदू की आंखें शर्म से झुक जाती है। भले ही हिंदुत्व की रोटी खानेवालों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है लेकिन आम हिंदुओं के मन में नफरत ही है। नरौदा पाटिया में बीजेपी एमएलए मायाबेन कोडनानी और बजंरग दल के नेता बाबू बजरंगी उस भीड़ की अगुवाई कर रहे थे, जिनके सीने में बरसों से लगनी वाली शाखाओं ने मुसलमानों के लिए नफरत के बीज बोए थे। गुजरात के बाहर से त्रिशुल , तलवार, बंदूके मंगाई गई। बीजेपी नेताओं की फैक्ट्री में ठीक वैसे ही हथियार बनाए गए, जैसे सरहद पार आतंकवादियों को दिए जाते हैं। तहलका के मुताबिक़, बाबू बजरंगी मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदीके इशारे पर सूबे में क़त्लेआम करवा रहा था। उसने लाशों का पहाड़ खड़ा करने की क़सम खाई थी। संघ परिवार के लोग खुलकर उसे मदद कर रहे थे। ये राम का हिंदुत्व है या कृष्ण का उपदेश कि नौ महीने की गर्भवती कौसर बानो कापेट चीरकर बच्चे को बाहर निकाला गया और उसे तलवार की नोंक पर रखकर शहर में घुमाया गया। बड़े शान से नारे लगे- जय श्री राम। मुन्ना बजरंगी वीएचपी महासिचव जयदीप पटेल को फोन पर लाशों की संख्या ऐसे बता रहा था कि मानों वो क्रिकेट का स्कोर बता रहा हो। सूबे की क़ानून व्यवस्था जिनके हवाले थी, उस गृह मंत्री गोवर्धन जफड़िया को भी वो ताज़ा आंकडे़ बता रहा था। संघ परिवार के इस घिनौने खेल में राज्य की पुलिस भी बराबरी का पापी बन रही थी। भावनगर में एस पी राहुल शर्मा बलवावियों पर गोली बरसाते हैं तो गृह मंत्री का फोन उन्हे रोकने के लिए आता है। क्योंकि बलवाई हिंदू थे, जो उनके इशारे पर नंग नाच रहे थे।
बजरंगी ख़ुद कहता है कि छारनगर आकर मोदी ने हत्यारों, बलात्कारियों, डकैतों, लूटरों को फूल माला पहनाकर उत्साह बढ़ाया । दंगों के बाद मोदी ने बजंरगी को चार महीने तक छिपने में मदद की। नाटकीय तरीक़े से गिरफ्तार कराया। उसे बाहर निकलवाने के लिए जजों के ट्रांसफर कराए। तब के पुलिस महानिदेशक साफ साफ अपने इमानदार अफसरों को कहते हैं कि ब्यूरोक्रेसी संघी शिविरों में बिक गई है। तब के पुलिस आयुक्त पी सी पांडे पुलिस की खाकी वर्दी और संघियों के खाकी निकर में फ़र्क़ करना भूल जाते हैं। तत्कालीन पुलिस महानिदेशक एन डी गडवी ने ज़िला मंत्री रमेश दवे से क्षत्रियों की तरह वादा किया कि जान जाए पर वचन जाए। चार पांच मुसलमानों कोतो वो ही मरवा देंगे। इस्पेक्टर के जी इर्दा ने मुसलमानों को सुरक्षित बाहर ले जा रही गाड़ी को दंगाइयों के हवाले कर दिए। पुलिस अफसर के आंखों के सामने एक मुसलमान का ख़ून होता है औऱ वो हंसता है। मोदी की शह पर राज्य के जाने माने हिंदू वकील एकजुट होते हैं। सबका इरादा एक है। अदालत से ख़ूनियों, बलात्कारियों , डकैतों को मासूम साबित कर बाहर निकालना है। भले हीवो बेस्ट बेकरी में दर्जनों मुसलमानों को जिंदा जला दें। गुजरात का ये एक ऐसा सच है , जिसे सोचकर आंखे शर्म से झुक जाती हैं।
गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के लिए सिर्फ मोदी ही ज़िम्मेदार नहीं है। केंद्र की सरकार क्या नीरो की तरह बैठी चैन की बंसी बजा रही थी। अगर देश का प्रधानमंत्री इस कुकृत्य के लिए राज्य सरकार की आलोचना और मुख्यमंत्री मोदी को कोसता है तो उसके बचाव के लिए उप प्रधानमंत्री और स्वंयभू लौह पुरूष उठ के खड़ा हो जाता है।
बाबरी मस्जिद की तरह गुजरात दंगों की जांच के लिए भी एक कमीशन है। लेकिन तारीख़ पर तारीख़ जारी है। अब कमीशन ने तहलका के टेप मंगाए है ये कहते हुए कि इसे जांच में शामिल किया जाएगा। क़ानून के जानकर मानते हैं कि अदालत में टेप को सबूत के तौर पर मान लिया जाएगा। क्योंकि टेप की प्रयोगशाला में जांच पड़ताल होगी। लेकिन बीजेपी क्या इसे आसानी से मान लेगी ? बीजेपी के सांसद कैमरे के सामने घूस लेते पकड़े जाते हैं, तब भी बीजेपी गाल बजाती है। कहती है कि टेप से छेड़छाड़ हुई है।वो इस टेप को इतनी आसानी से मान लेगी ?
क्या इस दंगे के लिए आम जनता को माफ किया जा सकता है , जिसने दंगों के बाद हुए चुनावी प्रचार में मोदी को गरजते हुए सुना। जीभर के तालियां बजाई। दिल खोलकर वोट डाले। एक बार फिर दंगाइयों के हवाले राज्य की सरकार कर दी ? ये आम जनता की हौसला अफ़ज़ाई का ही नतीजा था कि संघ का पाला पोसा हुआ हिंदुस्तानी हिटलर के आंकड़े में गुजरात की आबादी सिर्फ पांच करोड़ हिंदुओं की होती है। उसकी जनगणना में मुसलमानों की संख्या शािमल नहीं होती। उसे उस आलाकमान से शाबाशी मिलती है, जिसे हिंदुस्तान को हिंदुस्तान कहने में शर्म आती है। वो बड़े ही शान से हमारे भारत को हिंदुस्थान कहता है। अल सुबह और शाम को लगनेवाली शाखाओं में जिस लौहपुरूष की पूजा की जाती है , वही लोहा राजनीती की आंच में ऐसा पिघलता है कि जिन्ना की मज़ार पर क़सीदे पढ़ने से नहीं चूकता।
मेरा सवाल पाठकों से है। तारीख़ पर तारीख का खेल तो जारी रहेगा। क्या आम लोगों को अब भी यक़ीन है कि जिन लोगों ने बाबरी मस्जिद ढहाई, जिन्होने गुजरात में ख़ून किया, बलात्कार किया, डाका जाला, राहज़नी और आग़जनी की - उन्हे कभी सज़ा मिल पाएगी ? जिन्होने हमारे और आपके राम को राजनीति के बाज़ार में बेचा , उन्हे कौन सज़ा देगा ? चुनाव आते ही जो राम नाम की रट लगा देते हैं , उन्हे क्या अब भगवान ही सज़ा देगा ?

13 comments:

आशीष said...

सही कहा आपने हिटलर और मोदी दोनों ही एक जैसे हैं...और शायद पागल भी...मोदी को मैंने कई बार अपने समाचार पत्र के लिए पहले गुजरात और फिर कुछ समय राजस्थान में कवर किया है...मोदी जब बोलते हैं तो ज़हर उगलते हैं..


http://bolhalla.blogspot.com

अनुनाद सिंह said...

मोदी के विकास कार्यों को देखकर सबकी सिट्टी-पिट्टी गुम है। हताशा में वही पुराने हथकण्डे अपनाये जा रहे हैं। बिके हुआ मिडिया और विदेशी हाथों के कठपुतली पत्रकार इसमें जी-जान से लगाये हुए हैं। पर लगता है उनका ये हथकण्डा भी 'बूमरैंग' करेगा। हिन्दू फिर सचेत हो जायेंगे।

भारत को गौरव के शिखर पर ले जाने के लिये कई और नरेन्द्र चाहिये।

संजय बेंगाणी said...

शर्म मीडिया को आनी चाहिए. जो राजनैयिको के हाथो खेलते हुए न राज्य में स्थापित शांति की चिंता है न देश की.

अगर लोगो में इस प्रसारण का असर जानना हो तो यहाँ आकर लोगो से कहो पत्रकार हूँ और जूते न पड़े तो कहना. लोगो में रोष है. मीडिया लोक भावना को न समझता था न समझता है.

संजीव कुमार सिन्हा said...

तानाशाही विचारधारा के मानस-पुत्रों का हश्र हिटलर जैसा ही होगा। 80 वर्षों के बाद भी भारत में वे दो-तीन प्रांतों से बाहर नहीं निकल पाए। भारत की जनता ने उनके विचार को ठुकरा दिया। जिसके प्रणेता यह घोषणा करते हो कि हिंसा ही क्रांति की जननी है। जो निर्दोष मजदूर, किसानों, महिलाओं,बच्‍चों के खून से अपनी प्‍यास बुझाते हो। जिसके लिए धर्म अफीम के समान है और जो हिन्‍दू धर्म को पानी पी पीकर गरियाता है। लेकिन पार्टी की बैठकों में मुसलमानों को नमाज पढने के लिए अवकाश देता है। ऐसे रक्‍तपिपासुओं और जनविरोधियों को श्री नरेन्‍द्र मोदी दिसम्‍बर में करारा जवाब देंगे। श्री मोदी की विशेषता है वे बुलेट से नहीं, बैलेट से जवाब देते है। अनुनादजी के विचारों से पूरी तरह सहमत हूं। भारत को गौरव के शिखर पर ले जाने के लिये कई और नरेन्द्र चाहिये। एक नरेन्‍द्र स्‍वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया में हिन्‍दू जागरण का शंखनाद किया था।

opmaurya said...

Chandan Pratap jee,

Jis prakar Gujrat mein musalmano ki hatya ki gayee wah ek nindaniya karya tha parantu kya aapne ya dharmnirpechchta ka jhanda uthane wale anekon dalon ne kabhi socha hai ki aisa akheer hua kyon?

Ho sakta hai ki meri batein aapko ek unmadi hindutwa wadi, RSS swayamsewak ka anargal pralaap lage parantu aasha karta hoon ki aap tark-vitark ke virodhi nahin honge aur mere vicharon ko jhelane ka sahas rakhate honge. Waise na to main RSS ka swamsewak hoon aur na hi unmadi unmadi hindutwa wadi. Main sirf apne desh se pyar karta hoon aur apni ankhe khulee rakhta hoon.

Kashmir mein lakhon hinduon ki izzat abroo luti, we beghar ho gaye, dar-dar ki thokaren khaa rahen hain aur unki sudh lene wala koi nahi. Aapka media un par hue julmon ko sunane kabhi nahin pahunchata kyonki usase TRP nahi badhati. Aap to unke astitva ko bhi aswikaar karte hain.

Kya ye muslim samaj ki ehshanfaramoshi nahi hai ki Kerala mein jinhe sthaniya nivasiyon ne apnakar "Mopla" yane ki Damad banaya unhi musalmano ne apne sharaddataon ke sath aisa sulook kiya jiske samane Godhara jaise saikadon dange phike pad jai. Ye abhi bahut door ki baat nahin hai. Itihas ke panne palatiye aapko suboot mil jayega.

Agar utni door naa jaana chahte hon to Bangladesh ka udaharan le lijiye. Jish desh ke nivasiyon (Bangali musalmano) ka safaya unhi ke pashchimi bhai (pakistani) karne ko aamada the unhe aazadi dilane meinBharat ne hi sahayog diya aur aaj we is upkar ko bhool kar islami aur poorvottar ke atankiyon ko apne yehan panah aur madad de rahe hai. Kya ye ehshanpharamoshi ki had nahi hai?

Aap sansar mein kisi ek desh ka naam bataiye jahan bahusankhyak, alpasankhyakon ki tarah rahate ho.

Hindu dharma sadbhav mein vishwash rakhata hai. Use mandir, masjid girje aur gurudware kisi se parhej nahin. Usne kabhi kisi anya dharmawalmbi ka dharmasthal nahin toda par Islam ne bharat mein pravesh karte hi pehla kaam yehi kiya.

Hindu dharma vishwa ke anya bhago mein bhi phaila, baudhdha dharma bhi yehi se gaya. Kya isne Talwar ke dam par aur jabardasti kisi ko apna mat swikaar karne par vivash kiya?

Hindu samaj hazaron salon se apni manayataon ko parishkrit karta hua yenha tak pahuncha hai ki wah sahaj hi kisi par war nahi karta. Yehan tak ki julm sah kar bhi pratikar kam hi karta hai aur shayad issi liye aaj tak jeevit bhi hai " kuchch bat hai ki hasti mitati nahi hamari sadiyon raha hai dushman daure jahan hamara"

Hindu samaj ki isi sahishnuta ko uski kamjori samajh kar uski manayataon, sanskriti, sanskaron aur yehan tak uske atmasamman ko bhi neecha dikhane ki koshish ki jati rahi hai. Aakhir "sahane ki bhi ek seema hoti hai".

Yeh ek katu satya hai ki sansar ke sabse shantipriya aur ahinsavadi samudai ko hathiyaar uthane ko majboor kiya gaya kyonki hazaron saalon ki kuntha ko koi to rasta lena hi tha bahar nikalne ke liye.

Jab Hinduon par julma hoten hain jaisa ki Kashmir, North-East, Kerala, West Bengal adi mein ho raha hai to wahan kisi ki nazar nahi pahunchati. Aapka media, Human right commission, voton ki roti sekane walen rajnitik dal sabhi ko saanp soongh jata hai. Taslima nasreen ki kitab par ban laga diya jata hai, Salman Rushdie ki kitab par ban laga diya jata hai, bagair unhe pade kyonki usase musalmano ki bhavnayen ahat hoti hai lekin MF Hussain Hindu Devi - Dewataon ke ashleel chitra banata hai to uska virodh kala aur abhivyakti par hamla karar de diya jata hai. Kiske dwara?…….. Isi media, dharmanirapekshta ke alambardaron dwara. Kyo??? ……… Kyonki musalman kattar hain aur naraz hone par ekjut hokar kisi ke paksh ya vipaksh mein vote karte hain, jabki Hindu apne vivek ka istemal karta hai, wo dharma ko bad mein rakhta hai vikas ke mudde ko pahle. To Hinduon ko unke vikashsheel hone ki saza dee ja rahi hai???……….. Zara vichar kijiye Pratap jee kya yehi soch nahi kam kar rahi hai?? Us par turra ye ki Hindu kattarvad se desh ko khatra hai. Hinduon ke paksha mein uthane wali bat ko alpsankhyak virodhi karar de diya jata hai jabki hinduo par hone wale atyachar par koi kuchch nahi bolta, Khulkar bhartsna bhi nahi karta use padosi desh ki sazish karar de diya jata hai. Kya yeh Hinduon ki kuntha badhata nahi hai? Is pakshpat ka anzam agar Godhra hota hai to uske liye zimmedar kaun hai………… Modi, BJP, RSS, VHP………… ya is tarah ka do-ranga chashma pahanane wale?

Zara vichar kiziye Pratap jee……………..

Anonymous said...

सिंह साहब,

अगर आपमें प्रताप है तो ओ पी मौर्य के सवालों का जवाब दीजिये । नहीं तो ये बता दीजिये कि आप किस पार्टी के लिये पत्रकारिता का पवित्र कार्य करते हैं?

Chandan Pratap Singh said...

Dear Mr. Maurya
i Have no right to abuse ur mentality. But hence u asked me to give reply so i am writng this mail. Dear Mr Maurya, Yes i am sanatani and i don't think to get certificate on this from RSS,VHP,BAJRANG DAL, Togadia, Singhal, Modi , Advani or from any one else. Ur proudiness of hinduism or being not mor or less then me also. But my religion, my faith and my nationlity is not allowing me to do work as inhuman, shameless. I dont belive to put liquid glass in shambuk's ear. I am not asking bali and sugriva to fight and to forget brotherness. I am not preeching them- KSHITI,JAL,PAWAK , GAGAN,SAMEERA, PANCHTATWA MIL BANA SHARIRA.If i would say these word then will also apply on own brother also.
2nd thing , ur saying all muslims are brutal. i am not aggrred. There is old story, when one scropio was dying in pond , one saint was trying to save him. The scropio was stinging him but the saint said- Agar Bichchu apna swabhav nahi chodhta to main kyon chodu. All muslims are not backword, communal, biased, anti nationals. if you want to open ur eyes the just cheak police records. every month when they grab anti indian spy, drugs supplier, hawala businessmans, illegal arms suppliers- among them how many are muslims and how many r hindus?
Dear Mr Maurya, I am a hindu. I am sanatani and i am a indian. But i 'll never pull sword against nay one one. Cause i love my nation. i'll seek justice from law. If u dont belive in law then please allow Sanghi gang to controll the law and order like gujrat where Poilce cops nad law makers were helping rioters.
Thx

Amit said...

Sir apana sahi likha hai hitlar to mar gaya par ajj bhi hamara samaj ma modi jasa log Hitler ki bhumika nibha rahi.Sir apana sochana par majbur kar daya akhir asa log satta ma bar bar chun kar kasa aa jata hai.ya hum sabo ko samajhna hoga.modi rupi Hitler ko sata sa dur karna ka lai hamko apkao hum sabko sochana hoga.

dilip bihari said...

aap ke vichar deshdroh ka hai.aap ke vichar kashmir jaisi stithi paida karne wala hai

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sa said...

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