Monday, May 2, 2011

लादेन ने उतार दिया पाकिस्तान का मुखौटा


मरते –मरते ओसामा बिन लादेन ने पाकिस्तान का मुखौटा उतार दिया। अमेरिकी ड्रोन हमले में लादेन उस जगह पर मारा गया, जहां पर पाकिस्तान हुकूमत का एक छत्र राज है। पाकिस्तान अब ये कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकता कि राजधानी इस्लामाबाद से लगभग साठ किलोमीटर दूर पर बसे शहर अबोटाबाद पर क़बालियों का क़ब्ज़ा है। पाकिस्तान दुनिया से अपना असली चेहरा छिपाए घूम रहा था। वो ताल ठोंककर दावा कर रहा था कि वो आतंकवाद का ख़ात्मा करना चाहता है। वो अपनी सरज़मीं का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा। यही दुहाई देकर पाकिस्तान अरसे से अमेरिका से तोल मोल कर अपनी माली हाली हालत को बचाए रखे हुए था।
भारत बार- बार दुनिया को पाकिस्तान का असली चेहरा दिखा रहा था। लेकिन अपने आका अमेरिकी की मेहरबानियों से पाकिस्तान अपने काले चेहरे पर परदा डाल लेता था। अमेरिकी नेता भी भारत आकर भारत की बात करते थे और पाकिस्तान पहुंचते ही उनका सुर बदल जाता था। फिर भी भारत ने हिम्मत नहीं हारी। धीरज और सब्र के साथ अमेरिका को समझाने में लगा रहा कि वो जिस पाल पोस रहा है, वो काला नाग है। एक दिन वो उसी को डस लेगा।
मुंबई पर आतंकवादी हमले के बाद बारत ने पूरी दुनिया को सबूत दिए कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ हैं। लेकिन पाकिस्तान ये दुहाई देता रहा कि वो खुद आतंकवादी से लड़ रहा है। वो दूसरे मुल्क में कैसे दहशतगर्दी फैला सकता है। भारत ने फिर कहा कि इकलौते ज़िंदा पकड़े गए आतंकवादी अजमल क़साब का नाता पाकिस्तान से है। भारत के इस बयान के बाद एक पाकिस्तानी चैनल भी क़साब के घर को दिखाया। उसके मां बाप से बात की। लेकिन पाकिस्तान इस सच को मानने के लिए राज़ी ही नहीं हुआ। वो अपने आका अमेरिका के क़दमों में गिरकर यही रोना रोत रहा कि मुंबई हमले से उसका कोई वास्ता नहीं हैं।
मुंबई हमले ही नहीं, कांधार प्लेन हाईजैक के आतंकवादी भी पाकिस्तान में छुट्टे घूम रहे हैं। मज़हब की आड़ में लोगों को भारत के ख़िलाफ भड़का रहे हैं। उनकी तस्वीरें, उनके भाषण भारत ने पाकिस्तान को दिए। लेकिन पाकिस्तान ने इसे भी मानने से इनकार कर दिया। बात बात परक सच पर परदा डालने में माहिर पाकिस्तान अब किस मुंह से कहेगा कि दुनिया का सबसे ख़रतनाक आतंकवादी उसके देश में कैसे छिपा बैठा था। क्या उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई को ख़बर तक नहीं थी। क्या ऐसा मुमक़िन है कि खुफिया एजेंसी को भनक तक न हो या सरकार को इसका अहसास तक न हो। ओसामा जिस जगह पर मारा गया, वो फौजी इलाक़ा है। क्या फौज की इजाज़त के बग़ैर लादेन वहां बस सकता था? अगर फौज को अपने रिहाइशी इलाक़े के बारे में भी जानकारी नहीं थी तो फिर वो सरहद पार की जानकारी कैसे रखती होगी? पाकिस्तान सरकार हर आरोप से इनकार करेगी। लेकिन इस सच को दफन नहीं किया जा सकता कि लादेन की मौत उस ठोर पर हुई है, जहां चांद- सितारे वाला सब्ज़े रंग का परचम लहराता है। इस परचम के अंदर क़ैद है पाकिस्तान का असली चेहरा, ख़ूनी चेहरा, दहशतगर्द चेहरा, जो अब तक अमेरिका को मासूम नज़र आता था। लेकिन क्या इसके बाद भी अमेरिका को पाकिस्तान का चेहरा मासूम नज़र आएगा?

2 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

हमारे लीड़रों में विल नहीं है...

Haris said...

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